(E) अभिक्रिया $(d)$ के लिए: $PCl_{3(l)} + 3H_2O_{(l)} \to 3HCl_{(aq)} + H_3PO_{3(aq)}$
ऑक्सीकरण अवस्थाओं की गणना करने पर: $PCl_3$ में $P$ की अवस्था $+3$ है,$H_3PO_3$ में $P$ की अवस्था $+3$ है। $Cl$ दोनों में $-1$ है। $H$ $+1$ और $O$ $-2$ है।
ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता है,इसलिए यह रेडॉक्स अभिक्रिया नहीं है।
अभिक्रिया $(e)$ के लिए: $4NH_{3(aq)} + 3O_{2(g)} \to 2N_{2(g)} + 6H_2O_{(g)}$
ऑक्सीकरण अवस्थाओं की गणना करने पर: $NH_3$ में $N$ की अवस्था $-3$ है,$N_2$ में $N$ की अवस्था $0$ है। $O_2$ में $O$ की अवस्था $0$ है,$H_2O$ में $O$ की अवस्था $-2$ है।
यहाँ,$N$ का ऑक्सीकरण ($-3$ से $0$) होता है और $O$ का अपचयन ($0$ से $-2$) होता है।
इसलिए,यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
$O_2$ ऑक्सीकरण कारक के रूप में और $NH_3$ अपचयन कारक के रूप में कार्य करता है।